मेड इन इंडिया: मल्टी वर्स टेक्नोलॉजीस ने लॉन्च किया ‘इन कोलैब’ नेटवर्किंग ऐप @in_collab @NxtGen_In

मेड इन इंडिया: मल्टी वर्स टेक्नोलॉजीस ने लॉन्च किया ‘इन कोलैब’ नेटवर्किंग ऐप @in_collab @NxtGen_In

कोलकाता: मल्टी वर्स टेक्नोलॉजीस प्रा. लि. ने भारत में निर्मित अपना पहला नेटवर्किंग ऐप ‘इन कोलैब’ लॉन्च करने की घोषणा की है। ‘इन कोलैब’ से आम लोग अब बड़ी आसानी से आपस में, संस्थाओं और सरकारों के साथ एक सुरक्षित और एंड टू एंड एन्क्रिप्टेड सिस्टम पर नई जानकारी प्राप्त करने, कुछ नया तैयार करने, दूसरों से कनेक्ट करने, संपर्क बनाने और विभिन्न ट्रांजैक्शन जैसी चीजें कर सकते हैं। इन कोलैब को ऐप स्टोर और गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है। 

सर्कल्स, पब्लिक और लाइव लोकल की मदद से अलग-अलग जगहों के लोग और बिज़नेस आपस में जुड़ सकते हैं। लाइव लोकल एक ऐसा पर्सोना है जो प्रमुख रूप से छोटे और स्थानीय बिज़नेस को सर्व करता है और उन्हें ऐसा डिस्कवरी प्लेटफॉर्म देता है जिसमें उन्हें प्रसिद्ध ग्लोबल एंटरप्राइज़ेस के समान ही मौका मिलता है।

सर्कल पर्सोना की मदद से यूज़र्स को एप्लिकेशन पर डिस्कशन और एक्शन के लिए एंगेज और डिस्कवर करने, ग्रुप्स और कम्युनिटीज़ बनाने का मौका मिलता है। यह एक ऐसा डिजिटल सपोर्ट है जो सभी को पसंद आएगा। क्योंकि यह, सामाजिक दूरियों के इस मुश्किल दौर में एक जैसी रुचियों वाले लोगों को एक साथ लाकर लोकल बिज़नेस को भी सपोर्ट करने के मौके तैयार करता है।

मल्टी-वर्स टेक्नोलॉजीस के एमडी और नेक्सजेन टेक्नोलॉजीस के एमडी और सीईओ, श्री ए एस राजगोपाल ने कहा, “इन कोलैब का उद्देश्य है लोगों का सशक्तिकरण करना ताकि वे अपने डिजिटल डेटा पर पूरा नियंत्रण प्राप्त करके अपनी शर्तों पर कॉन्टेन्ट इस्तेमाल और शेयर कर सकें।“

अपने अकाउंट और डेटा पर यूज़र का पूरी तरह कंट्रोल हो इसके लिए यह ऐप यूज़र्स को फ्री और डेडिकेटेड 256 बिट एन्क्रिप्टेड पर्सनल स्टोरेज 5 जीबी वॉल्ट देता है जहां यूज़र्स अपनी पसंद और दिलचस्पी वाले कॉन्टेन्ट, ज़रूरी कागज़ात, बिल, फोटो और बहुत सी दूसरी चीज़ें स्टोर कर सकते हैं। वर्क पर्सोना में इसके अलावा एक इंफीनिटवॉल्ट भी मिलता है। जिसमें एंड-टू-एंड बैकअप करके उन्हें सभी डिवाइसेस पर सिंक किया जा सकता है। इससे किसी भी साइज़ की फाइल को सुरक्षित तरीके से सिंक करके एक ही संस्था के सहकर्मियों के बीच बड़ी आसानी से शेयर किया जा सकता है।

ऐक्टिविटी फीड्स इस सिस्टम की एक और विशेषता है। ऐप पर रियल टाइम इन्फॉर्मेशन आती है इंटीग्रेटेड एआई अल्गॉरिथम के साथ। और जल्द ही इसमें फैक्ट चेकर भी जुड़ जाएगा। जिस पर किसी कॉन्टेन्ट को टैग करके उसकी सच्चाई और सामाजिक स्वीकार्यता का भी पता लगाया जा सकता है। इसका उद्देश्य अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को रोकना नहीं बल्कि लोगों में जागरुकता बढ़ाना है।  अलग- अलग क्षेत्रों से प्रमुख जानकारों का एक बोर्ड, छपे और इस्तेमाल हो रहे कॉन्टेन्ट की निगरानी करेगा। फिर भले ही वह कॉन्टेन्ट मल्टी-वर्स टेक्नोलॉजीस का ही क्यों न हो।

इसकी सिस्टम ऐप्लिकेशन्स के भीतर हल्के, और टास्क संबंधित टूल्स यानि माइक्रो एप्स को इन्टीग्रेट किया गया है। यह माइक्रो ऐप्स डिवाइस एग्नॉस्टिक होते हैं यानि डिवाइस कौन सी है इससे इनके संचालन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। इन्हें कस्टम डेवलप किया है ताकि मौजूदा और नई ऐप्लिकेशन्स को मॉर्डनाइज़ किया जा सके। इन कोलैब के एडाप्टेबल यूआई और डायरेक्ट टू कस्टमर फोकस्ड यूएक्स, संस्थानों और सरकारों को भी सीधे तौर पर लोगों से जुड़ने और उनके साथ कॉन्टेन्ट शेयर करने में मदद कर सकते हैं। इससे ज्यादा से ज्यादा सहकार्य सुनिश्चित किया जा सकता है।

लाइव-लोकल की मदद से इन यूनिट्स का भी अपना ई-कॉमर्स होगा, जो उन्हें सीधे उनके ग्राहकों से जोड़ेगा। स्थानीय छोटे व्यापारी अब ग्राहकों को ठीक उसी तरह सेवा दे सकते हैं, जैसी उन्हें किसी ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर मिलती है। इन कोलैब सभी सामाजिक लोगों, प्रतिष्ठानों और सरकारों के लिए सुरक्षित विकल्प है।

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