सर्वे में खुलासा: 56% भारतीय परिवार कर रहे हैं पाचन स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना

सर्वे में खुलासा: 56% भारतीय परिवार कर रहे हैं पाचन स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना

कोलकाता: पैकेज्ड आटा ब्रांड आशीर्वाद के उन्नत प्रोडक्ट आशीर्वाद आटा विद मल्टीग्रेन्स ने विश्व पाचन स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर हाल ही में भारतीय परिवारों के ‘पाचन स्वास्थ्य एक सर्वे’ कराया।

भारत में माताओं के लिए एक अग्रणी प्लेटफॉर्म मॉम्सप्रेसो ने ब्रांड के लिए यह सर्वे संचालित किया। इसके लिए दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बंगलुरू, हैदराबाद और चेन्नई में 25-45 वर्ष की उम्र की 538 माताओं की प्रतिक्रियाएं ली गई। इस समूह में कामकाजी माताएं, महिला व्यवसायी, आंत्रप्रेन्योर्स, नौकरीपेशा महिलाओं और गृहणियों तक को शामिल किया गया।

सर्वे के नतीजों से ग्राहकों की जीवनशैली और खानपान की आदतों का भी पता चलता है। नतीजों में यह सामने आया कि 77% भारतीय माताएं पाचन स्वास्थ्य को काफी महत्वपूर्ण मानती हैं, जबकि 56% माताओं को लगता है कि उनके परिवार के सदस्यों को पाचन संबंधी समस्याएं हैं। सर्वे में यह भी पता चला कि 50% भारतीय परिवारों में 2-3 तरह की पाचन संबधी समस्याएं हैं। इनमें गैस, एसिडिटी और बदहज़मी तीन सबसे बड़ी समस्याएं हैं, क्योंकि सर्वे में भाग लेने वाले 50% प्रतिभागियों को इनमें से कम से कम एक समस्या ज़रूर थी।

50% से ज्यादा लोग यह सोचते हैं कि पाचन समस्याओं का असर हमारे शरीर के वज़न, ऊर्जा स्तर पर पड़ता है। साथ ही कई लोगों को पेट में असामान्य गड़बड़ी का भी सामना करना पड़ता है। 40% महिलाओं को लगता है कि उनका और उनके परिवार के लोगों का गट हेल्थ (पेट की स्थिति) खराब है। इनमें क्रमश: सबसे ज्यादा प्रभावित उनके पति, सास-ससुर/अभिभावक और वे खुद रहती हैं। गट हेल्थ को सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाले कारक हैं हमारी जीवनशैली और खानपान। जीवनशैली से संबंधित जो चीजें इन सभी में समान थीं उनमें नींद का अनिश्चित समय, तला-भुना और मसालेदार भोजन, कम पानी पीना और हफ्ते में 1.5 बार से भी कम व्यायाम। इनमें से 70% से भी ज्यादा लोगों ने माना कि पाचन संबधी समस्या को दुरुस्त करने के लिए वे घरेलू उपचार और रोज के खान-पान की आदत सुधारने पर जोर देते हैं।

खानपान में फाइबर युक्त खाना जैसे कि गेहूं के प्रोडक्ट, अनाज, फल, पत्तेदार सब्ज़ियां आदि का सेवन करने से पाचन सुधरता है और पेट या आंत से संबंधी अन्य समस्याएं भी दूर होती हैं। इनसे ताकत मिलती है,पेट भरा सा लगता और वज़न कम करने में भी मदद मिलती है।

इस पहल पर बात करते हुए गणेश कुमार सुंदररामण, एसबीयू चीफ एक्जिक्यूटिव – स्टेपल्स, स्नैक्स एवं मील्स, फूड्स डिविजन, आईटीसी लिमिटेड ने कहा, “पाचन समस्याओं की वजह से जीवन की गुणवत्ता प्रभावित होती है। लेकिन खानपान की आदतों में बदलाव लाकर इसे दुरुस्त किया जा सकता है। ऐसे में विश्व पाचन स्वास्थ्य दिवस एक सही अवसर है इस बारे में लोगों को जागरुक करने के लिए। हमारी कोशिश है कि हम अपने प्रोडक्ट्स के ज़रिए ग्राहकों को उनकी सेहत का ख्याल रखने में मदद करें। हमारा प्रोडक्ट आशीर्वाद आटा विद मल्टीग्रेन्स एक ऐसा ही प्रोडक्ट है जिसमें गेहूं, सोया, चना, ओट, मक्का और सत ईसबगोल जैसे 6 अलग अनाज हैं जिससे इसमें फाइबर की अच्छी मात्रा आ जाती है। अपने रोज के भोजन में इस आटे को शामिल करके उपभोक्ता अपनी रोज की फाइबर का सेवन बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा अन्य चीजें जो फाइबर रिच हों, उन्हें खाने में शामिल करके और शारीरिक रूप से ऐक्टिव रहकर उपभोक्ता स्वस्थ लाइफस्टाइल अपना सकते हैं।”

जानी-मानी डाइटीशियन अनुभा टपरिया का कहना है कि फाइबर पाचन तंत्र का समर्थन करता है जो पोषक तत्वों के अवशोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। फाइबर एक ऐसे ईंधन की तरह है जिसका इस्तेमाल करके कोलन सेल्स खुद को स्वस्थ्य रखती हैं। इससे डाइजेस्टिव ट्रैक्ट निर्बाध रूप से काम करता रहता है, जिससे बोवेल मूवमेंट नियमित और परेशानी रहित होता है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानि आईसीएमआरभी कहता है कि हर किसी को अपने रोज के भोजन में कम से कम 40 ग्राम डाइटरी फाइबर को शामिल करना चाहिए (2000 के-कैलोरी डाइट के आधार पर)।

अच्छे पाचन स्वास्थ्य के महत्व पर ग्राहकों का ध्यान आकर्षित करने के लिए आशीर्वाद आटा विद मल्टीग्रेन्स कई माध्यमों की सहायता से संदेश प्रसारित कर रहा है। इस विषय के जानकारों की मदद से ब्रांड, ग्राहकों को उनका डाइजेस्टिव कोशेंट यानि डीक्यू चेक करने में भी मदद कर रहा है। आप http://happytummy.aashirvaad.com/ पर लॉग इन करके डीक्यू चेक करने के साथ ही इस विषय में सलाह भी ले सकते हैं।

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