अध्ययन: कोलकाता में बच्चों, बुजुर्गों और गरीबों को वायु प्रदूषण से सबसे ज्यादा नुकसान

अध्ययन: कोलकाता में बच्चों, बुजुर्गों और गरीबों को वायु प्रदूषण से सबसे ज्यादा नुकसान

कोलकाता: स्विचऑन फाउंडेशन द्वारा राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर एक धारणा अध्ययन को डॉक्टर के राउंड टेबल सम्मेलन में प्रस्तुत किया गया था, जिसमें पता चला कि 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चे, 50 वर्ष से अधिक उम्र और कम घरेलू आय वाले लोग स्वास्थ्य समस्याओं से सबसे अधिक असुरक्षित हैं, जो वायु प्रदूषण के कारण हो सकते हैं।

सम्मेलन में कोलकाता के प्रमुख डॉक्टरों ने वायु प्रदूषण को ‘कोविड के अगले बड़े हत्यारे’ के रूप में माना है, और उसे कम करने के लिए तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए ऐसा मानते है।

कोलकाता के 5 शीर्ष डॉक्टरों के साथ एक आभासी राउंड टेबल सम्मेलन आयोजित किया गया था। इस अवसर पर 30 से अधिक शिक्षा संस्थान उपस्थित थे और सौ से अधिक युवाओं और नागरिकों ने इसमें भाग लिया।

कोविड19 की तरह वायु प्रदूषण तेजी से शहरीकरण-दुनिया के शहरों में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर रहा है। बंगाल में तेजी से बिगड़ती वायु गुणवत्ता की समस्या हर गुजरते दिन के साथ और भी ख़राब होती जा रही है, खासकर सर्दियों के महीनों में। रिपोर्ट के अनुसार, बंगाल में वायु प्रदूषण के कारण होने वाली मौतों की संख्या राज्य में कोविड मौतों की संख्या से लगभग 8 गुना अधिक थी। इस समस्या को कठोर उपायों के माध्यम से हल किया जा सकता है।

2,000 से अधिक नागरिकों के साथ किया अध्ययन से पता चला है कि कोलकाता, बैरकपुर और हावड़ा शहरों में, सांस लेने की सामान्य समस्या, जैसे की छींक, खाँसी, गले में खराश, साइनस और नाक की भीड़, से पीड़ित होने की संभावना 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में तीन गुना अधिक थी और 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में देर गुना अधिक थी।

यह इनडोर और बाहरी दोनों वातावरणों में विभिन्न हानिकारक प्रदूषकों के संपर्क में आने के कारण हो सकता है। 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में सांस और सीने में तकलीफ सबसे ज़्यादा है। अध्ययन में पाया गया कि औपचारिक शिक्षित लोगों में जागरूकता शामिल थी; तीन गुना से अधिक औपचारिक शिक्षा-विहीन लोगों ने वायु गुणवत्ता को औपचारिक शिक्षा वाले लोगों की तुलना में बेहतर माना।

इस रिपोर्ट में कुछ प्रमुख सिफारिश की गई है जिन्हें तत्काल रूप में कार्यकृत किया जा सकता है। नागरिकों की स्वास्थ्य सुरक्षा को बनाए रखने के लिए एक सुरक्षित वातावरण बनाने की दिशा में प्रशासनिक नीतियां आवश्यक हैं। इस दिशा में, राज्य में प्रचार, सामान्य जागरूकता पैदा करने और समय-समय पर स्वास्थ्य सलाह जारी करने के लिए एक नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करना चाहिए।

इस मुद्दे से बेहतर तरीके से निपटने के लिए स्थायी गतिशीलता में बदलाव लाना चाहिए। एनसीएपी के 2017 के स्तर से 30% उत्सर्जन में कमी के लक्ष्य को पूरा करने के लिए जनता द्वारा तैयार और कार्यान्वित नीतियों की सख्त कार्रवाई आवश्यकता है।

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